Sadko Ke Phool Best Poem By Amita Bhatt

सड़को के फूल

ये माना ये कलियाँ नहीं बाग की,
मगर रोज़ देखा है चलते हुए !
हां माना के रौनक भी थोड़ी सी कम है,
ये सड़को के हैं फूल खिलते हुए !

जो देखे इन्हें जो सबारे इन्हें,
जो सींचे इन्हें जो उबारे इन्हें !
ना ऐसा इन्हें कोई माली मिला,
जो देदे बसंत की बहारे इन्हें !

यहीं फूल होते अगर बाग के,
तो हम देखते इनको हस्ते हुए !
हा माना की रोनक भी थोड़ी सी कम है,
ये सडको के है फूल खिलते हुए !

है सूने से आँगन हमारे भी लेकिन,
हमे इन फूलो की जरुरत नहीं है !
है खुशबू भी इनमे वही ताजगी है,
मगर हमको इनसे मोहब्बत नहीं है !

है आदत हमे फूल बाज़ार के हो,
जो नोटों के खर्चो पर मिलते है हमको !
हर इक ख़वाहिशो को भी पूरा किया पर,
जो चाहा था हमने मिला ना हमको !

हर इक रोज़ सीचा था पोधो को हमने,
हर इक फूल की हमने परवाह भी की थी !
वो दो दिन खिले और मुरझा गए फिर,
जो की हमने सेवा वो बेकार ही थी !

जो दुःख अब हुआ है तो जाना है इतना,
की फूलो में कोई भी अंतर नहीं है !
ये कुदरत की सौगात है इस धरा पर,
हरएक ही बुरी और हरएक ही भली है !

ये दाबा है खुलके जिएंगे ये इक दिन,
जो है आज धूलो में लिपटे हुए !
है बस इनको इक आशरे की जरुरत,
ये सड़को के है फूल खिलते हुए !

तो क्यों न हम इक फ़ैसला आज करले,
के सडको के फूलो से अब घर सजेंगे !
जो पहले के फूलो के सेवा की हमने,
हां वैसे ही हम इनकी परवाह करेंगे !

फिर इक रोज़ आयेगा वैसा भी कि जब,
हर इक ओर खुशबू बस इनकी मिलेंगी !
हर इक आके पूछेगा हमसे ये बातें,
ये सुंदर सी कालिया कहा पर मिलेंगी !

हा होगा गर्ब हमे उस वक्त और हम,
कहेंगे जरा लय बदलते हुए !
ओ मेडम ! ये बाज़ार के गुल नहीं है,
ये सडको के है फूल खिलते हुए !

Written By – Amita Bhatt

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3 thoughts on “Sadko Ke Phool Best Poem By Amita Bhatt”

  1. आप हमेशा ही बहुत good जानकारी शेयर करते है यह जानकारी मेरे लिए बहुत ही फायदेमंद है इसके लिए आपका बहुत बहुत आभार है भाई

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